बहुत पुरानी कहावत है कि ”अकेला चना भाड़ नही फोड़ सकता लेकिन मोदी के केस में ऐसा नहीं है. वो अकेले जीत दिला सकते हैं. ताजा उदाहरण है त्रिपुरा. मोदी लेफ्ट के मजबूत गढ़ माने जाने वाले त्रिपुरा में जीत हासिल कर चुके हैं.

मेघालय, नागालैंड और त्रिपुरा में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतगणना जारी है. रुझानों के अनुसार त्रिपुरा में भाजपा+ ने दो तिहाई बहुमत हासिल कर लिया. वहीं, मेघालय में सत्‍तारुढ़ कांग्रेस आगे चल रही है, जबकि नागालैंड में बीजेपी+ और एनपीएफ में कड़ी टक्‍कर को देखने को मिल रही है.

पहली बार त्रिपुरा में बीजेपी ने लेफ्ट को पछाड़ते हुए सरकार बनाने की तैयारी कर ली है. पार्टी 59 सीटों में 43 सीटों पर आगे चल रही है. नागालैंड में भी बीजेपी सरकार बनाने की स्थिति में दिख रही है. नागालैंड में बीजेपी और एनडीपीपी गंठबंधन 31 से ज्यादा सीटों पर आगे है, जबकि एनपीएफ 23 सीटों पर आगे है, कांग्रेस का यहां अभी तक खाता भा नहीं खुला.

मेघालय में सत्ताधारी कांग्रेस 21 सीटों पर आगे चल रही थी. मेघालय में कांग्रेस की 10 साल से सरकार है और बीच में अगर तीन महीने के लिए 2008 में लगे राष्ट्रपति शासन को छोड़ दें तो नागालैंड में भी 2003 से कांग्रेस सत्ता में है. ऐसे में भाजपा पूर्वोत्तर में हुए इन चुनाव में सबसे बड़ी विजेता के रूप में उभरी है.

पार्टी कार्यकर्ताओं में जश्‍न का माहौल है. भाजपा महासचिव राम माधव और पार्टी के राज्‍य प्रमुख बिप्‍लव देव पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ जश्‍न मनाते दिखाई भी दे रहे हैं.

त्रिपुरा में पार्टी की बड़ी जीत के बाद भाजपा ने शाम को संसदीय दल की बैठक बुलाई है. सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में त्रिपुरा के मुख्‍यमंत्री के नाम को लेकर चर्चा और फैसला लिया जा सकता है. बैठक से पहले अमित शाह दोपहर को दिल्‍ली स्थित भाजपा मुख्‍यालय पहुंचे, जहां कार्यकर्ताओं ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया.