गजब होते हैं ये मध्यवर्गीय परिवार के लड़के…
मध्यवर्गीय परिवार के लड़के, सामान्य लड़के नहीं होते, वो पूरी दुनिया में एकमात्र ऐसे लड़के होते हैं जो गोल रोटियां बनाते हुए भी बरमुड़ा ट्रायएंगल के रहस्य के विचार को विस्तार दे सकते हैं, न्यूटन के दिए गए गैसों के अणुगति सिद्धांत को पढ़ते-पढ़ते वो तय कर चुके होते हैं कि कुकर में कितना पानी कितनी दाल और कितने आलू के बीच पानी और चावल से भरा लोटा रखा जाएगा, कि उतने ही गैस में एक साथ दाल चावल और आलू एकसाथ पक सकेगा.

जर्मन वैज्ञानिक हैइगेंज को मालूम रहा हो, या न रहा हो, मगर मध्यवर्गीय परिवार के लड़के जानते हैं कि कितने वॉट का बल्ब लगाने से कमरे में पर्याप्त प्रकाश भी रहेगा और बिजली का बिल भी कम आएगा.

मध्यवर्गीय परिवार के लड़के जो साहित्य पर बहस की शुरुआत, सूर मीरा तुलसी कबीर जयशंकर,प्रेमचंद्र भारतेंदु से करते हैं, और बहस के बीचो बीच इमर्सन थोरो रस्किन से होते हुए सविता भाभी पर जाकर अटक जाते हैं…मध्य वर्गीय परिवार के लड़कों को बाबा बमबाज और चचा चालबाज से लेकर सुकरात के संदेश मुजबानी रटे होते हैं.

वो मध्यवर्गीय परिवार का कोई लड़का ही था जिससे मास्टर साहब ने पहली बार पूछा था कि हिंदी के सबसे बड़े उपन्यासकार का नाम बताओ तो उसने छाती चौड़ी करके बताया था- वेदप्रकाश. उस रोज़ उसने मास्टर जी की डांट और लप्पड़ खा ज़रूर लिया था लेकिन ये बात नहीं मानी थी कि उसका जवाब सही नहीं है, क्योंकि मार्च से शुरु हुई गरमी से लेकर सितंबर की शाम तक उसने गांव के बेरोजगारों को बड़ी तादाद में वेदप्रकाश का उपन्यास पढ़ते देखा था.

उसके मन में तभी ये बात बैठ गई थी कि गांव का हर नौजवान अगर वेदप्रकाश का उपन्यास पढ़ रहा है तो सबसे बड़े उपन्यासकार वेदप्रकाश ही हैं.इसीलिए उसने मास्टर जी की बात नहीं मानी थी. दरअसल बात मानने वाली थी ही नहीं, और मध्यवर्गीय परिवार के लड़के सबकी बात मान लें ये जरूरी भी नहीं.

मध्यवर्गीय परिवार के लड़कों को बेपनाह चिंता होती है घर की, परिवार की वो छोटे भाई बहनों के लिए बाप बनकर जिम्मेदारी उठाने का वादा जरूर कर लेते हैं, भले ही उनकी खुद की पीठ को 34 छेद वाली बनियान ढकती हो.

मध्यवर्गीय परिवार के लड़के पहाड़ होते हैं…धीर गंभीर पहाड़, या कुछ भुरभुरे से जो जरा सा दबाव भी नहीं सह पाते या फिर शांत चित्त जो आवेश में ज्वालामुखी बनकर फट भी पड़ सकते हैं, ऐसे पहाड़ जिन पर उगती हैं औषधियां, उगते हैं सफेद फूल, और कई बार उगते हैं जहरीले कांटे..

मध्यवर्गीय परिवार के लड़के ही होते हैं सच्चे और अच्छे प्रेमी, धर्मवीर भारती के चंदर जैसे या फिर सिरफिरे दीवाने, जो लड़की के इनकार पर मर जाते हैं या मार जाते हैं किसी को भी, मध्य वर्गीय परिवार के लड़कों से ही है दुनिया…

गजब होते हैं ये मध्यवर्गीय परिवार के लड़के…

ये लेख अजीत त्रिपाठी ने अपने फेसबुक पर लिखा था. हम यहां ले आए परमिशन के साथ. अजीत इलाहाबाद से है. वही इलाहाबाद जहां से अमिताभ बच्चन  है. जनाब आज तक में काम करते हैं. फेसबुक पर इनकी वनलाइन हचककर बिकती हैं.