त्रिपुरा में बीजेपी को बड़ी जीत मिली है. जीत इतनी बड़ी थी की बीजेपी के समर्थकों से संभाली नहीं गई. त्रिपुरा में सोमवार को कई जगह हिंसक झड़पें हुईं. इन्हीं झड़पों के बीच ‘भारत माता की जय’ नारे लगाती भीड़ ने त्रिपुरा के बेलोनिया शहर के सेंटर ऑफ कॉलेज स्केवेयर में खड़ी लेनिन की मूर्ति को जेसीबी मशीन से गिरा दिया. 

इस प्रतिमा को गिराने के जो वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं, उनमें प्रतिमा गिरने का जश्न मनाने वाले लोगों ने बीजेपी की टोपी पहनी हुई है.

 

साल 2013 में जब लेफ्ट ने चुनाव जीते थे, तब इस प्रतिमा को लगाया गया था. 11.5 फुट फाइबर ग्लास की ये प्रतिमा स्थानीय कलाकर कृष्ण देबनाथ ने तीन लाख रुपयों में बनाई थी.

जानिए- कौन हैं लेनिन?

साल 1870 में वोल्गा नदी के किनारे रूस के सिम्बिर्स्क शहर में ‘उल्यानोव’ परिवार में एक बच्या पैदा हुआ. नाम रखा गया “दीमिर इलीच उल्यानोव”. बाद में नाम को छोटा कर दिया. अब नया नाम था “लेनिन”.

लेनिन

रूस के इतिहास में लेनिन का नाम का एक अलग ही स्थान है. क्यों कि रूस को साम्यवाद का सर्वेसर्वा इसी कॉमरेड ने बनाया था. लेनिन, दुनिया को पहली कम्यूनिस्ट सरकार देने वाला नेता के नाम से जाने जाते है.

लेनिन के घर में शुरू से ही पढ़ाई-लिखाई वाला माहौल था. उन्हें कानून की पढ़ाई करनी थी इसलिए ग्रेजुएट होने के बाद भी लेनिन ने साल 1887 में कजान विश्वविद्यालय के विधि विभाग में एडमिशन लिया. लेकिन जब पढ़ाई करने कॉलेज पहुंचे तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. वजह थी उनकी क्रांतिकारी सोच.

कॉलेज से निकाले जाने के बाद भी लेनिन ने हार नहीं मानी. घर पर पढ़ाई कर के एक्ज़ाम दिया और 1891 में लॉ की डिग्री हासिल कर ली.

साल 1889 में उन्होंने स्थानीय मार्क्सवादियों का संगठन बनाया और मार्क्सवादियों के नेता बने. अपनी क्रांति के दौरान उन्हें जेल में भी जाना पड़ा और उन्होंने कई किताबें भी लिखी.

मार्क्सवादी विचारक लेनिन के नेतृत्व में 1917 में रूस की क्रांति हुई जिसे बोल्शेविक क्रांति कहा जाता है. उस दौरान लोगों के दिल में विश्वयुद्ध को लेकर बहुत गुस्सा था. उसके बाद बोलशेविक खेमे के लोग सरकार के खिलाफ उतर आए.

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साल 1914 में पहले विश्व युद्ध के दौरान रूस में सबने चाहा कि उसका देश जीत जाए. लेनिन और बोल्शेविक फ़ौज चाहती थी की रूस हार जाए. यहां तक कि बोलशेविकों के नेता लेनिन ने रूस के दुश्मन जर्मनी से आर्थिक संधि भी कर ली थी. लेनिन ने इस कदम के बाद बोल्शेविक क्रांति की धार और तेज कर दी. धीरे-धीरे बोलशेविकों ने सरकारी इमारतों में कब्जा करना शुरू कर दिया. इस तरह से सत्ता में बोलशेविक काबिज हो गए. यही रूसी क्रांति थी, जिसने रूस का भविष्य बदल दिया और बोलशेविक सत्ता में आए और लेनिन उनके नेता बन गए.

लेनिन को इतिहास के सबसे महानतम क्रांतिकारियों में से एक माना जाता है.साल 1924 में 54 की उम्र में लेनिन की मौत हो गई. मौत कि वजह थी, स्ट्रोक. लेनिन की मौत के बाद उनके शव को दफनाया नहीं गया था. लेनिन को हमेशा जिंदा रखने के लिए बॉडी को ममी में तब्दील कर दिया है. फिलहाल ये ममी मॉस्को के रेड स्क्वॉयर में रखा है.