2 अप्रैल को भारत बंद था, हिंसा हुई, कुछ लोग मरे भी. आज 4 अप्रैल है. आज एक और मामला सामने आया है. मामला दलितों और उच्च जाति के बीच टकराव का ही है लेकिन थोड़ा अलग है.

उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में एक गांव पड़ता है. नाम है निजामपुर. निजामपुर गांव ठाकुर बहुल क्षेत्र है. अब मामले पर आते हैं. दरअसल, हाथरस के रहने वाले संजय कुमार की निजामपुर की शीतल से शादी होने वाली है. शादी की तारीख भी तय है, 20 अप्रैल. लेकिन शादी में एक पेच फंस रही है.

संजय जाटव समुदाय से आते हैं. संजय की चाहत है उनकी बारात पूरे गांव में घूमते हुए शीतल के घर पहुंचे, शीतल के परिजन भी यही चाहते हैं, लेकिन गांव वाले इसके लिए तैयार नहीं हैं.

ग्रामीणों ने संजय की मांग को परंपरा के खिलाफ करार दिया है. गांव के एक बुजुर्ग ग्रामीण ने बताया कि गांव में आज तक बारात नहीं घूमी है. बुजुर्ग के अनुसार, जिसका जहां घर है, बारात वहीं तक जाती है. ग्रामीणों को कहना है कि परंपरागत तौर पर जो चला आ रहा है, वही चलना चाहिए. एक ग्रामीण के मुताबिक, बीच में सड़क भी बहुत संकड़ी है, जिसके कारण बारात निकल भी नहीं सकेगी. लेकिन संजय को ग्रामीणों की बात से आपत्ती है.

संजय का कहना है कि, ‘मैं एक खास रास्ते से बारात ले जाने को लेकर दृढ़ हूं, प्रशासन को मेरी मदद करनी चाहिए क्योंकि मैं भी भारत का नागरिक हूं. संजय का आरोप है कि शादी के दौरान वह घोड़ी पर चढ़ना चाहते हैं, लेकिन उच्च जाति के लोग इसका विरोध कर रहे हैं. संजय ने बताया की इस मामले में पुलिस ने कोर्ट में दलील दी थी कि इस मामले में गांव की परंपरा को तवज्जो दिया जाना चाहिए. कासगंज प्रशासन ने 21 मार्च को दोनों समुदायों के 10-10 प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर गांव में शांति-व्यवस्था बनाए रखने लिए बांड देने को कहा था.

संजय ने बताया उसने पुलिस-प्रशासन के रवैये से नाखुश होकर हाई कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर उचित निर्देश देने की मांग भी की थी. जिसे अदालत ने ठुकरा दिया. हाई कोर्ट ने इसका निस्तारण करते हुए इसे कानून-व्यवस्था का मामला करार दिया था. इस मामले में उच्च न्यायालय ने स्थानीय पुलिस में मामला दर्ज कराने या संबंधित अदालत में याचिका दायर करने को कहा था.

जिसके बाद कासगंज पुलिस ने बारात ले जाने के संभावित रूट का नक्शा कोर्ट में पेश किया था. इस नक्शे के अनुसार, बारात को 800 मीटर तक की दूरी तय कर लड़की पक्ष के घर तक पहुंचना होगा. लेकिन इस बात से भी संजय खुश नहीं है वो अभी भी उसी जिद्द पे अड़ा है. अब ये तो 20 अप्रैल को ही पता चलेगा की संजय की बारात पूरा गांव घूमती है या नहीं.


 

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