उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव से पहले प्रदेश की राजनैतिक फेरबदल हो सकता है. प्रदेश की दोनो बड़ी और प्रतिद्वंद्वी पार्टी गठबंधन कर सकती है. बताया जा रहा है कि मायावती अपनी विरोधी पार्टी सपा को समर्थन दे सकती है.

हालांकि अभी इसका औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, सूचना के मुताबिक, शनिवार को मायावती के घर एक बैठक हुई है, जिसमें समर्थन पर चर्चा हुई है.

बसपा सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में बसपा सुप्रीमो मायावती की ओर से गोरखपुर और इलाहाबाद के जोनल को-ऑर्डिनेटरों को निर्देश भी दे दिए गए हैं. लोगों को मानना है कि भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश में यह दोनों बड़े दल एक बार फिर साथ आ सकते हैं.

प्रदेश के दोनों दलों के एक साथ आने पर पिछड़े, दलित और मुसलमानों का बेहतरीन ‘कॉम्बिनेशन’ बनेगा. इन तीनों की आबादी राज्य में करीब 70 फीसदी है. तीनों एक मंच पर आ जाएंगे तो भाजपा के लिए मुश्किल हो सकती हैं.

2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा को एक भी सीट नहीं मिली थी, जबकि सपा मात्र पांच सीटों पर जीत सकी थी. साल 2०17 के विधानसभा चुनाव में सपा केवल 47 सीटों पर जीती थी, जबकि बसपा 19 सीटों पर ही सिमट गई थी. उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 और लोकसभा की 80 सीट हैं.