साउथ की फिल्में कौन नहीं देखता. और जो देखता है वो रवि तेजा को तो जानता ही होगा. रवि को साउथ का अमिताभ बच्चन भी कहा जाता है. रवि एक अच्छे अभिनेता ही नहीं, अच्छे इंसान भी हैं. रवि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ब्रांड एंबेसडर भी रह चुके हैं. रवि फालतू के लफड़ों से दूर रहते हैं. किसी भी तरह के विवाद में नहीं पड़ते. वो सिर्फ मन लगाकर अपना काम करते हैं. यही वजह हैं की आज साउथ के सुपरस्टारों में उनका भी नाम लिया जाता है और ‘मास महाराजा’ के नाम से बुलाया जाता है.

रवि लगभग 60 से अधिक फिल्में कर चुके हैं. साल 1999 और 2002 में उन्हें स्पेशल ज्यूरी अवॉर्ड मिल चुका हैं। इसके अलावा साल 2008 में बेस्ट एक्टर स्टेट नंदी अवॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है.

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साल 1968 में जब पूरा देश गणतंत्र दिवस मना रहा था. उसी दिन आंध्र प्रदेश के जग्गमपेटा में रवि तेजा का जन्म हुआ. रवि को बचपन से ही फिल्में देखने और घुमने का शौक था. फिल्मी करियर में उन दिनो जिस तरह कलाकार पैसा कमा रहे थे उसे देख रवि को लगाता था कि अभिनेता बनकर वह भी दाम और नाम दोनो आसानी से हासिल कर सकते हैं.

रवि अपने तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं. उनके पिता राज गोपाल राजू फार्मासिस्ट और मां राजलक्ष्मी भूपति राज गृहिणी हैं. रवि के बचपन का ज्यादातर समय उत्तरी भारत में बीता है. उनकी पढ़ाई-लिखाई जयपुर, दिल्ली, मुंबई और भोपाल के स्कूलों में हुई है. अपनी एनएसएम की पढ़ाई पूरी करने के बाद रवि ने विजयवाड़ा के सिद्धार्थ डिग्री कॉलेज से स्नातक किया है.

साल 1988 में वह फिल्मों में काम करने के लिए चेन्नई चले गए. रवि उन दिनो अपने घर-परिवार की माली हालत ठीक करने के लिए स्ट्रगल कर रहे थे। उन्हें रोजी-रोटी की दरकार थी, नौकरी कहीं मिल नहीं रही थी तो उन्होंने अपने बचपन के शौक को ही रोजी रोटी का जरिया बनाने का फैसला कर लिया. उन्हें शुरू के दिनो में इस तरह संघर्ष करना पड़ा कि अक्सर उनका मन इस काम से उखड़ जाता था, लेकिन वह भागे नहीं.

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रवि जब चेन्नई आए थे तो उनके पास खाने तक के पैसे नहीं थे. जुगाड़ से एक मामूली कमरे में वाईवीएस चौधरी और गुनशेखर के साथ रहने लगे. रोज यहां-वहां जाते लेकिन कोई काम नहीं मिलता. ऐसे दिन गुजरता रहा किस्मत बदली और साल 1990 में रवि को कर्तव्य में एक रोल मिल गया. फिर साल 1991 में गुंडाराज में भी मामूली किस्म के रोल किया. हीरोगिरी में दाल न गलती देख रवि ने असिस्टेंट डाइरेक्टर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया.

उसी दौरान उनकी मुलाकात कृष्ण वाम्सी से हुई. वाम्सी के साथ उन्होंने वर्ष 1996 की एक हिट फिल्म ‘नेने पल्लदुथा’ में असिस्टेंट डाइरेक्टर के तौर पर काम किया. इस फिल्म में रवि ने एक छोटा सा रोल भी किया था.

साल 1997 में उनकी किस्मत का दरवाजा खुल गया. इस साल रवि को वाम्सी की ही फिल्म ‘सिंधुरम्’ में मुख्य अभिनेता का रोल मिल गया. रवि ने इस फिल्म में दिल लगा कर काम किया. इस फिल्म को तेलुगू की सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला. इस साल के बाद रवि के अच्छे दिन आ चुके थे. रवि के इल्लू श्रवण सुब्रह्मण्यम, चिरंजवीलू, अरुणू वल्लदिरू इस्ता पादरू, इडियट, खडगम, अम्मा नन्ना ओ तमिल अम्माई, वेंकी जैसी सफल फिल्मों में अभिनय का मौका मिलता गया. अक्षय कुमार स्टारर ‘राउडी राठौर’ रवि तेजा की ही एक फिल्म का रीमेक रही है.

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साल 2012 में फोर्ब्स इंडिया की टॉप 100 सेलिब्रिटी की में रवि को 50वें स्थान पर रखा गया. साल 2013 में फोर्ब्स की लिस्ट में वह 68वें और वर्ष 2015 में 74वें स्थान पर रहे.

रवि आज तेलुगू फिल्मों के सबसे अधिक लोकप्रिय कलाकारों में एक हैं. रवि आज तेलुगु सिनेमा के सबसे अमीर एक्टरों में एक सबसे ज्यादा कमाई कर रहे हैं। एक के बाद एक उन्होंने कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं। फिल्मों के साथ साथ उनकी कमाई में भी इजाफा हुआ है. निर्देशक पुरी जगन्नाध के साथ रवि ने कई हिट फिल्में दी हैं. रवि खुद इस बात को मानते हैं कि पुरी जगन्नाध की वजह से ही वो इतने बड़े सुपरस्टार बन पाए.

रवि अब फिल्म में काम करने के लिए 2 से 5 करोड़ रुपए तक लेते हैं. हैदराबाद में उनका एक घर और फार्महाउस भी है. रवि के पास गाड़ियों का बड़ा कलेक्शन है मर्सडीज से लेकर रेंज रोवर और फॉर्च्यूनर जैसी कई गाड़ियां उनके पास हैं. साउथ के मास राजा आज बहुत से युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन चुके हैं.