राजस्थान का पाली जिला. जहां मौजूद है श्री ओम बन्ना मंदिर. इस मंदीर की सबसे खास बात ये है कि यहां किसी भगवान की मूर्ति नहीं बल्कि एक बुलेट मोटर साइकिल की पूजा होती है. लोग दूर-दूर से इस बाइक की पूजा करने आते हैं, उस पर फूल मालाएं चढ़ाते हैं. मत्‍था टेकने वालों की जमात बहुत ही लंबी और पुरानी है. इस मोटरसाइकिल के सामने न केवल आम लोग मत्‍था टेकतें है बल्कि उस इलाके की सुरक्षा की जिम्‍मेदारी जिनके कंधों पर है यानी कि पुलिस वाले भी इस मोटरसाइकिल की खुब पूजा करतें हैं. अब आप सोच रहें होंगे कि आखिर ऐसा क्‍या है इस मोटरसाइकिल में जो लोग इसकी पूजा अर्चना करतें है तो आइये हम आपको बतातें हैं इसके पीछे छिपे रहस्‍य के बारें में.

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क्या है कहानी?

राजस्‍थान से अहमदाबाद जाने वाले राष्‍ट्रीय राजमार्ग पर पाली पड़ता है. पाली से लगभग 20 किलोमीटर दूर रोहित थाना क्षेत्र में इस बुलेट मोटरसाइकिल का मंदिर स्थित है. इस पूरे मामले के पिछे एक पुरानी कहानी छिपी है. पाली शहर के पास चोटिला गांव में सन 1988 में ठाकुर जोग सिंह रहा करते थे. उनका एक बेटा था, नाम था ठाकुर ओम सिंह राठौर. ठाकुर ओम सिंह राठौड़ का जन्म 5 मार्च 1965 में हुआ था. राजस्थान में राजपूतों को बन्ना सा बोलने का रिवाज है, इसलिए ओम सिंह राठौड़ को भी ओम बन्ना कहा जाता था.

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ओम बन्ना अपने पिता की इकलौती संतान थे और पूरे परिवार के लाडले थे. बचपन से ही उन्हें बड़े प्यार से पाला गया. जो भी उनकी इच्छा होती उन्हें वह चीज दिला दी जाती. उन्हें बाइक चलाने का बड़ा शौक था इसलिए जैसे ही ओम बन्ना थोड़े बड़े हुए उन्होंने रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल खरीद ली. यह मोटरसाइकिल ओम बन्ना को बहुत पसंद थी. ऐसा लगता था कि जैसे उनकी जिंदगी बस इसके इर्द गिर्द ही घूमती थी. वह हर समय अपनी इस बाइक पर बैठे ही दिखाई देते थे.

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बाइक लेने के थोड़े समय बाद ही ओम बन्ना की शादी हो गई. उनका ससुराल उनके गाँव से ज्यादा दूर नहीं था. इसलिए ही वह बीच-बीच में अपनी बाइक पर अपनी पत्नी को बिठा कर उनके गाँव निकल जाया करते थे.

साल 1988 तारीख 2 दिसंबर. हमेशा की तरह ओम बन्ना अपनी बाइक पर सवार हो कर अपनी पत्नी के गाँव गए थे. उनकी पत्नी गर्भवती थी इसलिए वह अपने घर आई हुई थीं. ओम बन्ना उनसे ही मिलने गए थे. वह अपनी पत्नी से मिले और शाम तक वहीं उनके साथ रहे. उसके बाद शाम को वह फिर अपनी बाइक पर बैठे और अपने घर की ओर निकल पड़े.

घर लौटते हुए ओम बन्ना को थोड़ा समय लग गया. वह जिस रस्ते से घर आ रहे थे उस रात वह पूरी तरह से खाली था. उस सड़क पर उन्हें न के बराबर ही वाहन दिखाई दे रहे थे. खाली सड़क देखते ही ओम बन्ना के अंदर का बाइक रेसर जाग गया. उन्होंने सोचा क्यों न इस समय का थोड़ा फायदा उठाया जाए.

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उन्होंने तुरंत ही अपनी बाइक की गति बढ़ा दी. ओम बन्ना अपनी तेज रफ़्तार बाइक का मजा ले ही रहे थे कि तभी सामने एक मोड़ आ गया. उन्होंने कोशिश की अपनी बाइक संभालने की मगर वह कुछ न कर सके. अगले ही पल उनकी बाइक ज़मीन पर पड़ी थी और ओम बन्ना उससे थोड़ी दूरी पर गिरे हुए थे. उनका शरीर बेजान पड़ गया था. ओम बन्ना की उस समय ही मौत हो गई थी.

पुलिस वाले भी हैरान थे-

अगली सुबह पुलिस घटनास्थल पहुंची. सीधा-सीधा समझ आ रहा था कि यह एक्सीडेंट का केस है. उन्होंने ओम बन्ना की लाश उनके घर पहुंचाई और बाइक को अपने साथ पुलिस स्टेशन ले गए. सब को लगा कि यह ओपन एंड शट केस है इसलिए किसी ने भी इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और ओम बन्ना की बाइक पुलिस स्टेशन के बाहर रख दी गई.

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अगले दिन जैसे ही पुलिस वाले स्टेशन में वापस आए उन्होंने देखा कि ओम बन्ना की बाइक वहां पर नहीं थी. सब लोग हैरान थे कि आखिर वह बाइक गई तो गई कहाँ?

किसी को भी कोई खबर नहीं थी कि कौन बाइक को लेकर गया है. पुलिस वालों को लगा कि जरूर किसी चोर ने उस बाइक पर अपना हाथ साफ़ किया है. इसलिए उन्होंने बाइक चोरी होने की सूचना बाकी पुलिस वालों को भी दे दी.

कुछ देर बाद ही पुलिस को सूचना मिली कि एक ‘RNJ 7773’ नंबर की बाइक चोटिला गांव के पास जोधपुर पाली हाईवे पर लावारिस हालत में खड़ी हुई है. यह बाइक ओम बन्ना की ही बाइक थी.

कुछ पुलिस वाले गए उस बाइक को वहां से बरामद करने के लिए. उन्हें लगा कि यह किसी चोर का काम है जो आखिर में बाइक यहाँ पर छोड़ गया है. उन्होंने बाइक बरामद की और वापस उसे थाने में ले गए.

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उस रात बाइक पुलिस स्टेशन में ही रही मगर अगले दिन फिर पिछली वाली घटना घटी. अगले जैसे ही पुलिस वाले स्टेशन में आए उन्होंने देखा कि ओम बन्ना की बाइक फिर से गायब है.

फिर थोड़ी देर बाद उन्हें खबर मिली कि ओम बन्ना की बाइक उनके दुर्घटनास्थल पर फिर से देखी गई है. पुलिस को समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर यह किसका काम है. उन्हें लगा कि शायद कोई उनके साथ मजाक कर रहा है.

इस बार पुलिस वालों ने सोच लिया कि चोर को कोई मौका नहीं देना है बाइक चुराने का. इसलिए उन्होंने बाइक का सारा पेट्रोल निकाल दिया. इतना ही नहीं उन्होंने बाइक को चेन से भी बांध दिया ताकि कोई उसे लेकर न जा सके.

पुलिस की कोशिशों के बाद भी अगले दिन जैसे ही वह पहुंचे उन्होंने देखा कि फिर से बाइक गायब है. इसके बाद कई बार उन्होंने बाइक को जब्त किया और हर बार वह फिर से दुर्घटनास्थल पर ही वापस मिलती थी.

इस बात की खबर जैसे ही आस पास के गाँव के लोगों को लगी उन्होंने इसे चमत्कार का नाम दे दिया. उनक मानना था कि इसमें ओम बन्ना की आत्मा बसती है. जब इस बात की खबर ओम बन्ना के पिता और उनके गाँव वालों को लगी तो उन्होंने कहा कि इस सिलसिले को ख़त्म करने के लिए उन्हें दुर्घटनास्थल पर ओम बन्ना का एक स्मारक बनाना पड़ेगा.

इसके बाद गाँव वालों ने उस दुर्घटनास्थल के पास ओम बन्ना के नाम से एक स्मारक बना दिया और उनकी बाइक को वहां पर रख दिया. उस दिन के बाद से वह बाइक वहां से कहीं नहीं गई. लोगों ने इसे चमत्कार मान लिया. तब से वह एक स्मारक नहीं बल्कि एक मंदिर बन गया.

ओम बन्ना के इस मंदिर में उनकी रॉयल एनफील्ड बाइक रखी हुई है और पास में उनका एक चबूतरा बना हुआ है. पाली जोधपुर हाईवे पर निकलने वाले सभी लोग यहां रुक कर अपना शीश झुकाते हैं.

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ओम बन्ना के मंदिर पर शराब की बोतलें प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती हैं. ऐसा कहा जाता है कि यहां पर निकलने वाले हर व्यक्ति को यहां पर शराब रखकर शीश झुकाना जरूरी होता है. लोगो का कहना है कि अगर ऐसा किसी ने नहीं किया तो उसके साथ दुर्घटना होने की गुंजाइश होती है.

नोट: इन बातों को कोई पक्का सबूत तो नहीं है कि यह सच है भी कि नहीं. फिर भी कई लोगों का मानना है कि यह सच है, तो वहीं कई लोग इसे अन्धविश्वास भी मानते है.