चापलूसी !
माना एक बला है
किन्तु गज़ब की कला है

ये कविता लिखी है महेश कुमार कुलदीप ने. ये कविता हम क्यों आपको बता रहे हैं वो आपको इस पूरी कहानी को पढ़ने के बाद पता चल जाएगा. तो कहानी सुनाते है, ध्यान से सुनिएगा.

ये बात है आज से एक दिन पहले की. यानी 19 अप्रैल 2018 की. इस दिन “सोने की चिड़िया” कहे जाने वाले देश यानी भारत( सोने की चिड़िया अब उड़ चुकी है) के प्रधानसेवक माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी अपने पांच दिवसीय विदेश दौरे के दूसरे पड़ाव में ब्रिटेन में थे. मोदी जी यहां ‘भारत की बात, सबके साथ’ कार्यक्रम के जरिए लोगों से रूबरू होने गए थे.

इस कार्यक्रम को जिसने होस्ट किया उनका नाम है प्रसून जोशी. महोदय सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष है, साथ ही ये जनाव हिन्दी कवि, लेखक, पटकथा लेखक और भारतीय सिनेमा के गीतकार भी हैं और ‘भारत की बात, सबके साथ’ में ये पत्रकार भी बन गए. वो भी ऊचे दर्जे के. इसका एक नन्हा उदाहरण देख लिजिए.

 

देखा जोशी का सवाल क्या खूब पूछा है ना!. और इस सवाल का जवाब देने के बाद मोदी जी गदगद हो गए. लेकिन गदगद मोदी और पत्रकार प्रसून जोशी यहीं नहीं रुके. ये कार्यक्रम दो घंटे 20 मिनट तक चला और ऐसे ही सवाल-जवाब चलते रहे.

हाल में ताल गूजती रही. लेकिन एक बात जो समझ नहीं आई वो ये है कि इस महफिल को किसने लूटी? गीतकार से पत्रकार बने प्रसून जोशी जी या खुद को फकीर बताने वाले मोदी जी ने. इसका जवाब हमें समझ नहीं आया था आपको आता हो तो हमें भी बताइएगा.


देखें पूरा कार्यक्रम