लखनऊ: भारत का सबसे बड़ा (जनसंख्या के आधार पर) राज्य. नाम है उत्तर प्रदेश. राज्य पोषण मिशन के एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक इस राज्य में 54 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषण का शिकार हो चुके हैं. आजमगढ़ जिले में बच्चे कुपोषण का शिकार हुए हैं. राज्य पोषण मिशन के निदेशक अनूप कुमार की मानें, तो प्रदेश के छह जिलों में 50 फीसदी से ज्यादा बच्चे कुपोषण के शिकार हैं. अगर यहां सरकार की तरफ से कारगर कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और भी बढ़ने की आशंका है.

हालांकि आंकड़ों की जानकारी मिलने के बाद सरकार की तरफ से इस मुसीबत से निपटने के लिए ‘शबरी संकल्प योजना’ की शुरुआत की गई है, जो राज्य के 39 जिलों में चलाई जा रही है.

सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, आजमगढ़ में 61 फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार हैं, जबकि दूसरे नंबर पर शाहजहांपुर है, जहां 54 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं. बदायूं में 53.6, कौशांबी में 52.8, जौनपुर में 52.7 और चित्रकूट में 52.5 बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. रिपोर्ट कहती है कि इसके अलावा 33 जिले ऐसे हैं, जहां लगभग 30 फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. इनमें मुख्यमंत्री का शहर गोरखपुर भी शामिल है.

राज्य पोषण मिशन के निदेशक अनूप कुमार ने बताया कि ‘कुपोषण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत प्रदेश में पांच वर्ष तक की आयु के लगभग दो करोड़ बच्चों का वजन कराया गया. इनमें लगभग 40 लाख बच्चे अपनी उम्र के हिसाब से कम वजन के मिले. इने कुपोषित बच्चों को एलो कैटेगरी में रखा गया है. इसके अलावा 1368734 बच्चे अति कुपोषित हैं, लिहाजा इन्हें रेड कैटेगरी में रखा गया है. अधिकारियों की मानें, तो दिसंबर 2018 तक कुपोषित बच्चों की संख्या हालांकि 28 फीसदी से घटाकर 26 फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखा गया है”.

हालांकि सरकार की तरफ से राज्य के 39 जिलों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए शबरी संकल्प योजना संचालित कर रही है. इसके तहत जिला स्तर के अधिकारी दो-दो गांवों को गोद लेकर वहां मिशन की ओर से चलाई जा रही योजनाओं की निगरानी करते हैं. इसकी रिपोर्ट वेबसाइट पर भी अपलोड की जाती है.

काम सही दिशा में हो रहा है या नहीं, इसके लिए मिशन की तरफ से भी क्रॉस चेकिंग कराई जाती है. इसके लिए निजी एजेंसियों के माध्यम से इसकी जांच करवाई जाती है. आंकड़ों के मुताबिक, अभी तक 3000 अधिकारियों ने उप्र में 6000 गांवों को गोद लिया है.