नीरव मोदी का इतिहास भी उतना ही बड़ा है, जितना बड़ा उसने फ्रॉड किया है.

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बुधवार की सुबह शेयर बाजार में हाहाकार मच गया. जिसकी वजह से हाहाकार मचा उसका नाम है नीरव मोदी. क्यो की मोदी साहब ने पंजाब नेशनल बैंक को लगभग 11330 करोड़ रुपए से ज्‍यादा का चूना लगा दिया. जिसके बाद बैंक का शेयर 10 फीसदी तक गिर गया. इससे पीएनबी के निवेशकों को 3 हजार करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा, वहीं सभी सरकारी बैंकों के निवेशकों को कुल मिला कर करीब 15 हजार करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा.

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जिसने बैंक को इतना बड़ा चूना लगाया है उसकी कहनी भी उतनी है बड़ी है. बात साल 2016 की हैं. तारीख 14 अक्टूबर. इस दिन हीरे के बड़े ब्रैंड नीरव मोदी की पांचवीं एनिवर्सरी थी. जिस जगह इनकी एनिवर्सरी मनाई गई उस जगह की भी अपनी एक अलग कहानी है. फिलहाल हम बात मोदी साहब की कर रहे है.

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पहुंचा हुआ आदमी हैं ये नीरव मोदी-

मोदी साहब ने अपनी एनिवर्सरी के लिए राजस्थान के सबसे खास शहरों में से एक शहर जोधपुर को चुना था. जगह थी, जोधपुर के महाराजा का महल, जो कि एक फाइव स्टार होटल में तब्दील हो चुका था. ये देश के लिए पहला मौका था, जब उसके सामने नीरव मोदी का नाम इतनी शिद्दत से लिया जा रहा था. नीरव के इस एनिवर्सरी पार्टी की सबसे बड़ी बात थी की इसमें जोधपुर के महाराजा गज सिंह मेहमानों का स्वागत करने के लिए पहुंचे थे.बताया जाता है कि महाराजा गज सिंह बेहद रिजर्व किस्म के आदमी हैं. इसके बावजूद वो उस इस उस पार्टी में पहुंचे थे.

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भारत से ही शुरू की व्यापार की शुरूवात

नीरव ने अपने व्यापार की शुरूवात भारत से ही शुरू की थी. मुंबई में नीरव ने अपने चाचा के साथ हीरे का काम शुरू किया, जो उनका पुश्तैनी धंधा था. लेकिन नीरव मोदी इसमें नए थे. यहां आकर उन्होंने 3,500 रुपये प्रति महीने पर काम शुरू किया. CNBC.com को दिए एक इंटरव्यू में नीरव बताते हैं कि वो हफ्ते में छह दिन और 12 घंटे काम करते थे, जिसके एवज में उन्हें ये 3,500 रुपये मिलते थे. करीब 10 साल के बाद उनके पास 50 लाख रुपए थे.

नीरव ने इंटरव्यू में कहा कि ‘मैंने घरवालों से कभी पैसे नहीं लिए. मुझे जो पैसे मिलते थे, उनको मैं निवेश कर देता था. अब मेरे पास 50 लाख रुपये थे. इसके सहारे मैं अपनी कंपनी खोल सकता था.’

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साल 1999, जब नीरव मोदी ने फायर स्टार नाम से डायमंड का कारोबार शुरू किया. इस कारोबार में उनके खुद के 50 लाख रुपये लगे थे. 15 लोगों के साथ नीरव मोदी ने ये कंपनी शुरू की थी. दुनिया में हीरे की 90 फीसदी कटिंग भारत में ही होती है. नीरव मोदी इस बात को बेहतर जानते थे. उन्होंने अपनी कंपनी के जरिए पॉलिश किए गए हीरों को अमेरिका और इंग्लैंड के बाजार में बेचना शुरू किया. अपनी कपंनी बनाने के बाद मोदी ने अपने 10 साल के एक्सपिरियंस का फायदा उठाया. मोदी के पास विदेशों के बहुत से क्लाइंट थे, मोदी अपने इन क्लाइंट्स के लिए ज्वैलरी डिजाइन करने लगे. भारत में डायमंड कटिंग की कास्ट विदेश के मुकाबले कम थी. इसका मोदी ने भरपूर फायदा उठाया. मोदी ने विदेशी क्लाइंट्स को सस्ते में सर्विस देनी शुरू कर दी और देखते ही देखते मोदी एक ग्‍लोबल कंपनी तैयार हो गई.

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अपनी कंपनी से सात गुना बड़ी कंपनियों को खरीद लिया-

बिजनेस शुरू करने के 5 साल के दौरान मोदी की कंपनी ने एक्सपेंशन के लिए अमेरिका की दो बड़ी कंपनीया फ्रेडरिक गोल्डमैन और सैंडबर्ग एंड सिकोर्सकी को खरीद लिया. ये कंपनी नीरव मोदी की कंपनी से सात गुना बड़ी थी. फ्रेडरिक गोल्डमैन कंपनी को नीरव ने साल 2005 में करीब 1 अरब 60 करोड़ रुपये में खरीद लिया. वहीं साल 2007 में नीरव मोदी ने अमेरिका की 120 साल पुरानी कंपनी सैंडबर्ग एंड सिकोर्सकी को करीब 3 अरब 20 करोड़ रुपये में खरीद लिया.

बिजनेस वर्ल्ड को दिए एक इंटरव्यू में नीरव मोदी ने कहा था कि ‘फायरस्टार बनाने से पहले मुझे अपने एक अंकल की फर्म में काम करने का मौका मिला था. ये किसी कारोबार को शुरू करने से पहले की सबसे जरूरी ट्रेनिंग थी. क्रिश्ची ऐंड सोथबी के ऑक्शन ने मुझे एक मौका दिया था. मुझे लगा कि इस क्षेत्र में बहुत से मौके हैं और फिर मैंने अपने कारोबार को विस्तार देना शुरू कर दिया.’

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फोर्ब्स ने भी 2017 में अपनी लिस्ट में जगह दी थी-

साल 2014 में नीरव मोदी ने नई दिल्ली की डिफेंस कॉलोनी में पहला फ्लैगशिप स्टोर खोला था. इसके बाद 2015 में नीरव मोदी ने मुंबई के काला घोड़ा में एक और फ्लैगशिप स्टोर खोला. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीरव मोदी ने 2015 में ही न्यू यार्क और हॉन्ग कॉन्ग में अपने बुटिक खोले. इसके बाद 2016 में हॉन्ग कॉन्ग में नीरव मोदी ने दो और बुटिक खोले. नीरव मोदी को दुनिया की मशहूर पत्रिका फोर्ब्स ने भी 2017 में अपनी लिस्ट में जगह दी थी. पत्रिका की सूची के मुताबिक नीरव मोदी की उस वक्त की कुल संपत्ति करीब 149 अरब रुपये थी.

149 अरब के मालिक नीरव ने कैसे लगाया पीएनबी को चूना-

सीबीआई को एक शिकायत पंजाब नेशनल बैंक की तरफ से मिली थी. इसके बाद सीबीआई ने अरबपति हीरा कारोबारी नीरव मोदी, उनके भाई निशाल, पत्‍नी आमी और मेहुल चिनुभाई चोकसी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. धोखाधड़ी का यह मामला 2017 का था. इसी शिकायत के बाद सीबीआई की तरफ से कार्रवाई की गई. इसके बाद बुधवार 14 फरवरी 2018 को पीएनबी ने अपने रेग्‍युलेटरी फाइलिंग में यह स्‍वीकार किया कि बैंक में 11400 करोड़ रुपए का फ्रॉड हुआ है. इसी के बाद शेयर बाजार में हाहाकार मच गया और सरकारी बैंकों के निवेशकों के 15 हजार करोड़ रुपए से ज्‍यादा डूब गए.

पंजाब नेशनल बैंक की मुंबई ब्रांच से हुए फ्रॉड ट्रांजैक्शंस से कुछ चुनिंदा अकाउंट होल्डर्स को फायदा हुआ. भाई निशाल, पत्नी ऐमी और मेहुल चीनूभाई चोकसी द्वारा किए गए इन ट्रांजैक्शंस के आधार पर अन्य बैंकों ने इन कस्टमर्स को विदेश में अग्रिम पैसा दिया. यह सब उच्च पदस्थ अधिकारियों की मदर से किया जा रहा था.

इस फ्राड का पूरा खेल लेटर ऑफ अंडरटेकिंग की आड़ में किया जा रहा था. इसके तहत एक बैंक की गारंटी पर दूसरे बैंक पेमेंट कर रहे थे. इस घोटाले में पंजाब नैशनल बैंक (PNB) के अलावा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक और एक्सिस बैंक के नाम भी सामने आ रहा है. हालांकि इन बैंकों का कहना है कि वह पीएनबी के लेटर ऑफ अंडरटेकिंग के आधार पर यह पेमेंट कर रहे थे. इस पूरे खेल का मास्‍टर माइंड नीरव मोदी को कहा जा रहा है.

नीरव मोदी की वजह से PNB को 11330 करोड़ रुपए से ज्‍यादा का चूना लगा है. इसके चलते बैंक का शेयर 10 फीसदी तक गिर गया था. इससे पीएनबी के निवेशकों को जहां 3 हजार करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा, वहीं सभी सरकारी बैंकों के निवेशकों को कुल मिला कर करीब 15 हजार करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा.

अब इस करोड़ों के फ्रॉड केस में पंजाब नेशनल बैंक ने आज सफाई दी. बैंक के एमडी सुनील मेहता ने कहा- “नीरव मोदी पैसा वापस करना चाहते थे लेकिन प्लान पुख्ता नहीं था.” उन्होंने कहा- “हमारा 123 साल पुराना संगठन है. दोषियों को पकड़ने के लिए हम पूरी ताकत से लड़ेंगे और उनके खिलाफ सख्त एक्शन लेंगे.”