आप कई बार एक झटके के कारण नींद से उठते हैं. पिछले 15 दिनों से मेरी जिंदगी एक सस्पेंस स्टोरी की तरह हो गई है. मुझे बस इतना पता है कि रेयर स्टोरीज को खोजते हुए मुझे एक रेयर बीमारी हो गई. मैंने कभी हार नहीं मानी और हमेशा अपनी पसंद के लिए फाइट की. मेरा पर‍िवार और दोस्त मेरे साथ हैं और हम इससे निकलने का पूरा प्रयास कर रहे हैं. कृपया किसी तरह के कयास न लगाएं. क्योंकि एक सप्ताह या 10 दिनों के अंदर जब जांच किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगी, मैं खुद अपनी कहानी आपको सुनाऊंगा. तब तक प्लीज मेरे लिए प्रार्थना कीजिए.

 

5 मार्च को शाम 4 बज के 6 मिनट पर इरफान ने अपने ट्विटर हैंडल से ये ट्वीट किया था.

इस ट्वीट के बाद तुरंत कयासों का बाज़ार गर्म हो गया. कोई कहने लगा कि उनको पीलिया है और वो विदेश इलाज के लिए जाने वाले हैं. कई फ़िल्मी सेलिब्रिटीज़ ने उनके अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करने लगे. इसके बाद मीडिया में खबर आने लगी की इरफान खान को ब्रेन ट्यूमर है.

 

 

दरअसल, ये मामला मुंबई के पत्रकारों के वाट्सएप ग्रुप से शुरू हुआ. ग्रुप में किसी ने लिखा कि इरफान खान को “शायद” ब्रेन कैंसर हुआ है. व्हाट्सएप में इस मैसेज के आने के बाद चैनल और वेबसाइटस मानो बौरा गई. ब्रेकिंग और एक्सक्लूसिव बनने के चक्कर में सबने इरफान खान के इस बीमारी को “ब्रेन कैंसर” बना दिया. वेबसाइट्स अपने हिट्स के चक्कर में एक से एक हेडलाइन बनाने लगी.

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कुछ चैनलों और वेबसाइटों ने इरफान को ब्रेन कैंसर होने की पुष्टि तक कर दी. ज्यादातर वेबसइट्स ने अपनी खबर की हेडलाइन में ? लगा दिया. कुछ ने हिट आने के बाद लगा दिया. कुछ ने इसे भी जरूरी नहीं समझा. कुछ इरफान के डायगनोसिस तक की बातें लिखने लगे. कोई किमोथेरेपी की बात करने लगा. कुछ ने उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती करवा दिया.

बाद में ख़बर ग़लत निकली. लेकिन तब तक खबर आग की तरह फैल चुकी थी. कुछ ने खबर को अपने वेबसाइट्स से हटा ली, कुछ ने इसकी भी जहमत नहीं उठाई.

इरफान ने अपने ट्वीट में साफ-साफ लिखा था कि स्वास्थ्य को लेकर कोई अटकलें न लगाई जाएं. वे खुद कुछ दिनों में इसकी पूरी जानकारी देंगे. इसके बावजूद मीडिया ने ये सारी खबरें बनाई.