एक बेटी पुलिस के पास गई और अपने पिता के खिलाफ छेड़छाड़ का मुकदमा दायर कर दिया. लड़की ने पुलिस से कहा उसके पिता उसके साथ अश्लील हरकतें करते हैं. मामला गंभीर था पुलिस ने तुरंत संज्ञान में लिया और पिता को गिरफ्तार कर लिया.

मामला कोर्ट में पहुंचा. कोर्ट में लड़की अपनी बात से मुकर गई. कोर्ट में लड़की ने बताया कि नहीं ये बात झूठी थी कि – ‘पिताजी मुझे छेड़ते हैं. लड़की ने बताया उसने अपने पिता के खिलाफ छेड़छाड़ का झूठा मुकदमा इसलिए दायर कर दिया क्‍योंकि पुलिस में बार-बार शिकायत करने के बाद भी पिता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी. लड़की ने कहा मेरे पिता मेरी बहन और मां के दुर्व्‍यवहार करता थे. मेरी मां को और मेरी बहन को मारते पीटते थे और गाली-गलौच भी करते थे.

अदालत ने मामले की सच्‍चाई जानने के बाद अदालत ने कहा कि लड़की ने झूठा मामला दर्ज कराने की बात स्वीकार की. उसने कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करने पर उसे यह कदम उठाना पड़ा.

अदालत ने पिता को यौन उत्पीड़न के आरोप से बरी किया लेकिन उसे पत्नी तथा दो नाबालिग बेटियों पर हमला करने और धमकी देने के आरोप में दोषी ठहराया. लड़की के साहस ने न्यायाधीश को प्रभावित किया और उन्होंने कहा कि अपनी मां की दुर्दशा देखकर यह उसकी ‘‘मजबूरी’’ थी कि उसने इस तरह के आरोप लगाए. अदालत ने पिता को एक साल के लिए अच्छा आचरण रखने के निर्देश के साथ 25 हजार रुपये के निजी मुचलके तथा इतनी ही राशि का एक जमानतदार देने पर प्रोबेशन पर रिहा कर दिया.