20 अप्रैल को खुद को देश का नंबर 1 अख़बार बताने वाले दैनिक जागरण ने खबर चलाई थी. ख़बर थी “कठुआ मामले में बच्ची के साथ बलात्कार नहीं हुआ”. जागरण ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए ये बाते कही थी. जागरण ने इस ख़बर को अपने “बिकाऊ अखबार”(जागरण कथित रूप से खुद को सबसे ज्यादा बिकने वाला अखबार बताता है) में पहले पन्ने पर छापी थी.

 

जागरण ने इस ख़बर को अपने वेवसाईट पर भी लगाया था, लेकिन बाद में हटा दिया. लेकिन फिर देर शाम ये खब़र उनके बेवसाइट पर मौजूद थी. जागरण ने इस ख़बर को जो दलीलें दी थी वो जागरण को भी शायद ही समझ आयी हो मतलब अजीब सी थी…समझ में आने से कोसे दूर थी

लेकिन अब ये मामला पूरा साफ है “कठुआ मामले में बच्ची के साथ बलात्कार हुआ था”. ये हम नहीं कि FSL की रिपोर्ट में कहा गया है. FSL की रिपोर्ट के बाद शायद इस केस की कई बातें साफ हो गई हैं.

दरअसल, दिल्ली फॉरेंसिक साइंस लैब में इस केस की जांच हो रही थी. जांच के दौरान पाया गया कि बच्ची के योनि से जो वेजाइनल स्वैब के नमूने लिए गए थे, वो आरोपी के सैंपल से मेल खाते हैं. वैजाइनल स्वैब टेस्ट एक खास तरह की जांच होती है. यानी लैब के मुताबिक़ कठुआ में उस आठ साल की बच्ची के साथ बलात्कार हुआ था.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक-

दिल्ली लैब के पास सबूत के तौर पर 14 पैकेट भेजे गए थे. जिनमे से वैजाइनल स्वैब, बाल के टुकड़े, चार आरोपियों के खून का नमूना, बच्ची के शरीर के अंग, जैसे आंत, बच्ची की फ्रॉक और सलवार, मिट्टी, घटनास्थल पर मिले खून के धब्बों वाली मिट्टी शामिल हैं. मामले की जांच कर रही पुलिस टीम ने मार्च में इन्हें जांच के लिए दिल्ली लैब के पास भेजा था.

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इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए FSL के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि जांच में बलात्कार की बात सच है. अधिकारी के मुताबिक लैब से जो सबूत मिले हैं, उससे यह साफ हो जाता है कि बच्ची के साथ रेप हुआ था. इतना ही नहीं पुलिस ने जांच के लिए जो सैंपल लैब में भेजे थे, वो भी आरोपियों के डीएनए से मेल खाते हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक –

बच्ची ने घटना के समय जो फ्रॉक पहना हुआ था, उसे भी जांच के लिए भेजा गया था. लेकिन ‘फ्रॉक को डिटर्जेंट से धोया गया था जिसकी वजह से ज्यादातर सबूत बर्बाद हो गए थे, लेकिन खून का एक धब्बा बचा रह गया. जो अहम सैंपल साबित हुआ.