पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए छात्र-छात्रा लगभग 50 हजार से 5 लाख तक रुपए लगाते हैं. (फीस संस्थान के हिसाब से ली जाती है) . इस पढ़ाई में 1,2 या 3 साल का समय लगता है . पढ़ाई खत्म होने के बाद छात्र-छात्रा नौकरी के लिए यहां-वहां भटकते हैं. कुछ को नौकरी मिल जाती है कुछ को नहीं मिलती. क्यों नहीं मिलती ये भी एक गंभीर मुद्दा है चर्चा होनी चाहिए.

फिलहाल  हम आपको एक संस्थान के बारे में बताते है जो इतनी पढ़ाई के बाद भी 2 साल की ट्रेनिंग करवा कर नौकरी देने की बात कर रहा है.

संस्थान का नाम है अमर उजाला. यहां हायरिंग चल रही है. जिस पोस्ट के लिए हायरिंग चल रही उसका नाम है “जूनियर कंटेंट राइटर ट्रेनी”. अमर उजाला “जूनियर कंटेंट राइटर ट्रेनी” से “जूनियर कंटेंट राइटर ” बनाने के लिए दो साल की ट्रेनिंग करवाएगा.

इसके लिए कोई तनख्वाह नहीं है. आने जाने का खर्चा मिलेगा. पहले साल 12,000 और दूसरे साल 14000. संस्थान ये 2000 क्यों बढ़ा रहा है वही जाने. इस ट्रेनी पद के लिए भी परीक्षा ली जाएंगी. परीक्षा पास करने के बाद 10 घंटें काम करना पड़ेगा. 18 से 20 स्टोरी रोज लिखनी होगी. मतलब फुल मजदूरी.

बस अमर उजाला इतनी ईमानदारी पर उजाला दिखा रहा है कि साफ-साफ लिखा है, उन्हें जूनियर कंटेंट राइटर ट्रेनी चाहिए, पत्रकार नहीं.