कहानी शुरू होती है जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले के एक छोटे से कस्बे जंगलात मंडी से. अनंतनाग जिसे घाटी में इस्लामाबाद भी कहा जाता है. 1990 के दशक में यहां के कई नौजवान पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर उग्रवादियों के कैंप में ट्रेनिंग लेने चले गए. वहां, इसी कैंप में एक 22 साल का नौजवान हथियार चलाने की ट्रेनिंग लेने पहुंचा. नौजवान का नाम था अल्ताफ मीर.

अल्ताफ 1994 में घर वापस लौट आया और दोबारा उग्रवाद से नहीं जुड़ा. घर वाले बहुत खुश हुए की उनका लाल घर लौट आया लेकिन घर वालों की खुशी ज़्यादा दिन तक नहीं टिकी. घाटी में उग्रवाद का जवाब उग्रवाद से दिया जा रहा था. भारत समर्थित उग्रवादियों का संगठन इखवान ने सिर उठा लिया था और अनंतनाग में ये बहुत मज़बूत था. इखवान के निशाने पर पाकिस्तान समर्थित उग्रवादी होते थे. अल्ताफ को डर था कहीं उसे भी न मार दिया जाए. इस डर के साथ वो 1995 में फिर उस तरफ चला गया. इस बार अल्ताफ उस तरफ तो गया लेकिन इस तरफ नहीं लौटा.

अल्ताफ पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर की राजधानी मुज़फ्फराबाद में बस गया. वहां वो एक एनजीओ में काम करने लगा. वहां लड़कों को चेनस्टिच सिखाने लगा. मुज़फ्फराबाद में ही उसने गाना और डफली बजाना सीखा.

मुज़फ्फराबाद में ही उसके एक दोस्त की शादी होनी थी. दोस्त ने वहां अल्ताफ को भी बुलाया था. अल्ताफ वहां गया और एक गाना गाया. इसी शादी में रेडियो का कोई अधिकारी भी आया था. उसने जब अल्ताफ का गाना सुना तो उसे अपने ऑफिस बुलाया. अधिकारी ने अल्ताफ को रेडियो के लिए काम करने की नौकरी दे दी.

धीरे-धीरे अल्ताफ ने रेडियो पर शो करना शुरू कर दिया. इसके बाद उन्हें कई जगह गाने के लिए बुलाया जाने लगा. उन्होंने भारत से पाकिस्तान गए तीन और लोगों– गुलाम मोहम्मद दार, सैफुद्दीन शाह और मंजूर अहमद खान – के साथ ‘कसामीर’ नाम से एक बैंड बनाया. गुलाम मुहम्मद सारंगी बजाते थे, सैफद्दीन शाह तुंबखनेर (ड्रम जैसा एक कश्मीरी लोकवाद्य) और मंज़ूर अहमद नौत (एक और कश्मीरी लोकवाद्य). ये बैंड वहां कश्मीरी गाने गाने लगा.

अल्ताफ मीर बताते हैं की कोक स्टूडियो पाकिस्तान नए टैलेंट की तलाश कर रहा था तभी एक महिला ने उनका नाम सुझाया. इस साल अप्रैल में कोक स्टूडियो के प्रोड्यूसरों ने अल्ताफ से मुलाकात की और उन्हें काम दिया. अल्ताफ ने अपने बैंड के साथ एक कश्मीरी गाना ‘हा गुलो’ को कोक स्टूडियो के लिए गाया.

ये गाना पाकिस्तान और हिंदुस्तान दोनों जगह खूब चल रहा है. 11 जुलाई को यूट्यूब पर अपलोड हुए इस गाने के पांच दिन में तीन लाख से ज्यादा व्यूज़ हो चुके हैं. अब उनका गाना दुनिया सुन रही है. पसंद कर रही है. इस गाने के आने के बाद भारत में अल्ताफ के घरवाले खुश हैं. वो अब बस इतना चाहते हैं कि अल्ताफ लौट आएं.