‘भगवान’ तक का रास्ता बताने वाला “बलात्कारी” आसाराम के दरिंदगी की कहानी

नाबालिग से बलात्कार के मामले में जोधपुर की अदालत ने धर्मगुरु आसाराम बापू को दोषी करार दिया है. आसाराम के अलावा शिवा, शरतचंद्र, शिल्पी और प्रकाश इस मामले में अभियुक्त हैं. फ़िलहाल आसाराम की सज़ा पर बहस चल रही है. जज सज़ा का एलान थो़ड़ी देर में कर सकते हैं.

आशाराम के जिस केस में सजा हुई है उसकी कहानी बेहद डरावनी है. असुमल हरपलानी से बापू – ‘संत’ आसाराम बनने के लिए आसाराम ने कई अपराध किए है. लेकिन हम आपको ‘संत’ आसाराम से बलात्कारी आसाराम बनने की कहानी बताते है-

77 साल के आसाराम पर आरोप था कि जोधपुर के निकट मनाई आश्रम में साल 2013 में उन्होंने 16 साल की लड़की का रेप किया था. लड़की के माता-पिता आसाराम के भक्त थे. परिवार उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर का रहने वाला था. परिवार आसाराम को भगवान मानता था. फिर एक दिन इस परिवार की आस्था टूट गई.  वजह थी इस परिवार के भगवान आसाराम ने परिवार की बेटी की इज़्ज़त से खिलवाड़ किया था. मामला खुला तो परिवार की आखें खुल गई,

कैसे खुली पोल-

अंग्रेज़ी मैग्ज़ीन कारवां में 1 अप्रैल, 2017 को छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, 7 अगस्त, 2013 को छिंदवाड़ा आश्रम, जहां इस परिवार ने अपनी बेटी को पढ़ने भेजा था वहां से एक फोन आया. ये फोन आश्रम में लड़कियों की हॉस्टल वॉर्डन संचिता गुप्ता उर्फ शिल्पी ने किया था.

शिल्पी ने कहा,

”आपकी बेटी की तबीयत खराब है और आपको फौरन छिंदवाड़ा आना पड़ेगा..

परिवार सारा काम-धाम छोड़ छिंदवाड़ा पहुंचा. वहां जाने पर पता चला कि उनकी बेटी को चक्कर आ गया था, जिसके बाद वो बेहोश हो गई थी. शिल्पी ने कहा कि लड़की पर बुरा साया है, जिसे आसाराम ही दूर कर सकते हैं. इस ‘इलाज’ की ज़रूरत जल्द से जल्द बताई गई. कहा गया कि बापू दिल्ली में हैं. आप वहां जाके कर उनसे मिले.

परिवार के लोग तत्काल दिल्ली पहुंचे, लेकिन वहां जाने पर पता चला कि आसाराम अभी जोधपुर में हैं. परिवार दिल्ली से जोधपुर पहुंचा वहां उनकी मुलाकात आसाराम से हुई. परिवार ने बापू से सब बताया जिसके बाद आसाराम ने परिवार को यकीन दिलाया कि वो पूजा करेगा जिसके बाद लड़की पर से बुरी शक्तियों का साया खत्म हो जाएगा.

15 अगस्त की रात लड़की को आसाराम ने अपनी कुटिया में बुलाया. साथ में उसके माता-पिता भी गए. कुछ मंत्र पढ़ने के बाद आसाराम ने मां-बाप को वापस भेज दिया. आगे की पूजा आसाराम लड़की के साथ कुटिया में अकेले करने वाला था. अपने बापू को अपनी बेटी सौंपकर मां-बाप बाहर आ गए. अपनी बच्ची की बेहतरी के लिए भजन करने लगे.

तकरीबन एक घंटे बाद आसाराम ने लड़की को कुटिया से बाहर भेजा. जिसके बाद वो 16 अगस्त की सुबह अपने परिवार समेत सभी लोग शाहजहांपुर के लिए निकल गए. घर पहुंचने के बाद लड़की ने अपनी मां को सारी कहानी बयां की…

लड़की ने बताया – कुटिया के अंदर मुझे एक गिलास दूध दिया गया. इसके बाद आसाराम ने मेरे साथ बदसलूकी करनी शुरू की. मै कुछ समझ पाता उससे पहले आसाराम ने अपने कपड़े उतार दिए और मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा. आसाराम ने मुझसे ओरल सेक्स करने का दबाव ड़ालने लगा. मै रोने लगी. लेकिन आशाराम नहीं रुका, आसाराम ने मुझे ज़बरदस्ती चूमा और गले लगाया. और…….
आसाराम ने कुटिया से बाहर भेजते हुए मुझे धमकी दी कि अगर मैने किसी के भी सामने मुंह खोला, तो उसके मां-बाप को मार डाला जाएगा.

 

ये सारी बातें कारवां में छपी रिपोर्ट के मुताबिक लिखी गई हैं.

इस सारी घटना के 20 अगस्त को आसाराम के इस दुर्व्यवहार के बाद लड़की ने इसकी शिकायत दिल्ली के एक पुलिस स्टेशन में की थी. अपराध की गंभीरता को देखते हुए एक ज़ीरो एफआईआर दर्ज हुई जिसमें आसाराम बापू के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (यानी रेप), 354 (यानी छेड़छाड़), 506 (यानी जान से मारने की कोशिश), 120-बी (आपराधिक साज़िश) प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज एक्ट यानी पोस्को की धारा 8 और जेजे एक्ट 23 व 26 के तहत मामला दर्ज किया. इनके अलावा आईपीसी की धारा 342 और 509/34 भी लगाई गईं.

इसके बाद दिल्ली के लोक नायक अस्पताल में लड़की का मेडिकल कराया गया. और इसके बाद आसाराम के खिलाफ मुकदमा कर लिया गया. धारा 164 के तहत दिल्ली में ही मजिस्ट्रेट के सामने लड़की ने बयान दिया. जिसके बाद 21 अगस्त को जोधपुर पुलिस ने अपने यहां मामला दर्ज कर लिया, क्योंकि अपराध उसके इलाके में हुआ था

उसके बाद आसाराम को इंदौर में गिरफ़्तार किया गया. गिरफ़्तारी के बाद आसाराम के समर्थकों ने भारी हंगामा और प्रदर्शन किया था. गिरफ़्तारी के बाद आसाराम की मर्दानगी का टेस्ट हुआ था जिसमें वो सफल पाए गए थे और फिर 2 सितंबर 2013 को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. उसके बाद से ही वो जेल में हैं. आसाराम की तरफ़ से अब तक 12 ज़मानत याचिकाएं दायर की गई थीं जिनमें से एक को भी स्वीकार नहीं किया गया.

साल 2014 में जब से इस मामले की अदालत में सुनवाई शुरू हुई, कई गवाहों पर आसाराम के समर्थकों ने हमले किए. आसाराम के निजी सहायक अमृत प्रजापति की मई 2014 में गोली मारकर हत्या कर दी गई.

उनके आश्रम में रसोइये का काम करने वाले अखिल गुप्ता की 2015 में मुज़फ़्फ़रनगर में हत्या कर दी गई. बलात्कार कांड के गवाह माने जानेवाले राहुल सचान को जोधपुर कोर्ट परिसर में चाकू मारा गया, बाद में वो लापता हो गए.

मामले के एक अन्य गवाह महेंद्र चावला को भी गोली मारी गई थी. कुल मिलाकर मामले के नौ गवाहों पर अब तक हमले हुए हैं जिनमें एक पत्रकार भी शामिल हैं. इनमें से तीन की मौत हो गई जबकि एक लापता हैं.

अब 5 साल बाद आध्यात्मिक गुरु और कथावाचक आसाराम को जोधपुर की कोर्ट ने नाबालिग लड़की से रेप केस में दोषी ठहराया है. और कुछ ही देर में सजा का ऐलान भी होने वाला है.