11 साल की रेप पीड़ित बच्ची को भाभी बोलने वाले इंसान नहीं हो सकते

अरबी भेड़ों.. शुक्र मनाओ कि जो बहुसंख्यक तुम से चार गुने अधिक हैं वो तुम्हारे “गीता भाभी” जैसे कमेंट पर तुम्हें सिर्फ़ गाली ही दे रहे हैं.. शुक्र करो बस कि ये भारत का संविधान मानते हैं और इनके पास कोई बर्बर ख़लीफ़ाओं का शरीया जैसा कुछ नहीं है वरना तुम घरों से घसीट के मारे जा रहे होते

ग्यारह साल की रेप पीड़ित बच्ची को तुम भाभी बोल रहे हो और मज़े ले रहे हो.. ये अरब नहीं है जहाँ ग्यारह साल की बच्चियां लोगों की पत्नियां बनाई जाती है.. अरबों का धर्म मानो मगर उनकी बीमार आदिम संस्कृति को उन्हीं तक रहने दो.. औरत तुम और तुम्हारे मज़हब के लिए क्या है ये तुम्हारा रिस्पांस बता रहा है गीता के केस में.. हमे शुरू से पता है कि आसिफ़ा तुम्हारे लिए बस एक “मुसलमान” से ज़्यादा कुछ न थी और उसका समर्थन तुम्हारे लिए “इस्लाम” के समर्थन से अधिक कुछ न था.. तभी जब तुम इंसानियत की बात करते हो तो मुझे हंसी आती है.. तुम्हारी इंसानियत की बातें मेरे लिए “स्टैंड अप अरेबियन कॉमेडी” से ज़्यादा कुछ नहीं होती है

तुम कनवर्टेड हो दोगलों.. तुम्हारे पुरखों ने डर के मारे सिर्फ़ धर्म बदला था अपना.. इसलिए समझो इसे.. गीता तुम्हारा ही ख़ून है.. वो बहन है तुम्हारी.. भाभी नहीं

जाहिल, बर्बर, नरपिशाच अरबी ख़लीफ़ाओं के नक़्शे क़दम पर चलना बन्द करो.. वरना हिंदुस्तान में भी तुम्हारे बहुत बुरे दिन आने हैं जान लो


ये लेख ताबिश सिद्दीकी जी ने लिखा है

ताबिश सिद्दीकी