आखर

आकाश शुक्ला यूँ तो पेशे से पत्रकार हैं लेकिन आजकल साहित्य के गलियारों में पहचाने जाने लगे हैं जिसकी वजह है इनकी पहली किताब “आखर”.

इस किताब को लेकर हमने आकाश से बातचीत की पेश है उसके कुछ अंश-

सवाल: अपने बारे  में बताइये ?

जवाब: इस सवाल से मैं खुद उलझा रहता हूँ. ठीक ठीक पता लगा तो खबर करूँगा. फ़िलहाल नाम आकाश है, उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से हूँ. बेहतर लिखने की कोशिश, बहुत कुछ पढ़ लेने की चाहत और दुनिया घूम लेने की ख्वाइश लिए मैं जिंदगी में बढ़ता जा रहा.

सवाल: आखर की शुरुआत कैसे हुई?

जवाब: आखर की शुरुआत सालों पहले हुई थी, यही कुछ 4/5 साल या शायद और भी पहले से. दरअसल कम कहने की आदत और बहुत कुछ कहने की चाहत ने नज्मों की दुनिया से जोड़ दिया. शब्दों से दोस्ती हो गई और बस फिर क्या चल पड़ी क़लम अपनी राह.

सवाल: नाम कैसे सोचा?

जवाब: आखर नाम की बात करें तो ये ठीक वैसा ही है जैसे मैं किताब में हर एक नज़्म, शायरी और ग़ज़ल में समन्दर भरने की कोशिश की. आखर, इस नाम पर अगर लिखना शुरु किया जाए तो शायद आखर ही कम पड़ जाए लेकिन कम शब्दों में इतना कहूँगा कि किताब के हर लफ्ज़ में दिल है, ये किताब धड़कती है और आखर खुद में बेहद गहरा है, शुरुआत जैसा है. जैसे मेरी शुरुआत है किताब से…

सवाल: एक लेखक के तौर पर आप किसे पढ़ना पसंद करते हैं?

जवाब: मैं बतौर लेखक ही क्यों एक पाठक के तौर पर पढ़ता हूँ और एक पाठक की नज़र से मैं वो सब कुछ पढ़ना चाहता हूँ जिससे मेरा साथ ना बीते कल से छूटे और ना ही चल रहे वक्त से ताकि आने वाले समय से भी एक पहचान बनी रहे. नाम गिनाने बैठा तो शायद जो भी मुझसे छूटे तो ये बेईमानी होगी. मैं बार बार कहता हूँ लिखने वाला दिल लिखता है, और मुझे तो बस वही पढ़ना आता है.

सवाल: एक लेखक होना कितना मुश्किल है ऐसे दौर में वो भी हिंदी ?

जवाब: एक लेखक होना मुश्किल कितना है ये कहना थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि ये मौला की नेमत है, ये मेरा मनना है. हां ये जरुर की हिंदी का लेखक होना थोड़ा मुश्किल वक्त से सामना करवा ही देता है. भले ही लोग हिंदी दिवस पर लम्बी चौड़ी पोस्ट लिखकर इसे मनाते हों लेकिन आज भी हिंदी कहीं न कहीं अपने वजूद को बचाए रखने में एक लड़ाई लड़ ही रही है और हम सब सिपाही ही हैं जो इसमें उसके साथ हर क़दम चल रहे हैं. उम्मीद है जीत एक दिन जरुर होगी.

सवाल: जो लोग लिखने का सोच रहे हैं युवा उन्हें आप क्या कहेंगे?

जवाब: युवाओं में लिखने पढ़ने की तरफ रुझान बढ़ा है. साहित्य की ये दुनिया बेहद संजीदा है. जो भी युवा इस तरफ बढ़ रहे मैं उनसे पहले ये जरुर कहूँगा कि मायनों को बचाये रखें. आप जो लिख रहे वो आप अपने पीछे छोड़ कर जा रहे और ये सवाल जरूर करना चाहिए खुद से कि हम अपने पीछे छोड़ कर क्या जा रहे हैं. मानकों को छेड़ें नहीं. कोशिश करें कि इस खूबसूरती को और बढ़ाएं और साथ ही पढ़ने और सुनने की क्षमता को बढ़ाएं. ताकि सीखने में कोई कमी न छूटे. बाकी लिखते रहें, कहते रहें और सुनाते रहें दिल के अफ़साने…

सवाल: क्या बेस्टसेलर होना एक किताब की सफलता है?

जवाब: बेस्टसेलर हो जाना किसी किताब की सफलता नहीं है. जरुरी है किताब का किसी का दोस्त हो जाना, उसका किसी का मीत बन जाना, रूह में उतर जाना.अगर आपका लिखा पढ़ने वाले की कहानी बन गया तो लेखन सफल. क्योंकि कहीं न कहीं लिखने वाला लिख कर आपसे जुड़ना ही तो चाहता है और चाहता है आपकी ज़िंदगी में आपके साथ होना.

सवाल:  आपकी कुछ लाइन्स-

आगे बहुत अन्धेरा होगा
खुद को रौशन रखना होगा